“भरोसे की कब्र (Part – 2): Crime का खेल”

सिया अब पहले जैसी नहीं रही थी। वो आरव के साथ रहती ज़रूर थी, लेकिन दिल कहीं और जा चुका था। उसकी मुस्कान बनावटी थी, और उसकी आँखों में अब वो भरोसा नहीं बचा था जो कभी उसकी सबसे बड़ी ताकत हुआ करता था। आरव ने सिया के हर शक को मिटाने की कोशिश की — उसके लिए फूल लाता, बाहर घूमने ले जाता, पर सिया के मन में वो “कॉल” अब एक ज़हर बन चुका था।

भरोसे की कब्र (Part – 2) : Crime का खेल

इसी बीच कुनाल और सिया की मुलाक़ातें बढ़ने लगीं। कुनाल चालाक था, जानता था कि सिया टूटी हुई है, और वही उसकी कमज़ोरी है। वो उसे बार-बार कहता, “तुम जैसे हो, वैसे रहने का हक सिर्फ़ तुम्हें है। कोई समझे या न समझे।”
धीरे-धीरे सिया को कुनाल में वो अपनापन दिखने लगा जो अब आरव में नज़र नहीं आता था। पर सच्चाई कुछ और थी — कुनाल सिया से नहीं, उसके घर और पैसों से प्यार करता था।

आरव ऑफिस से लौटता तो अक्सर सिया बालकनी में किसी से फ़ोन पर बात कर रही होती। पूछने पर जवाब मिलता — “बस मम्मी से बात कर रही थी।”
लेकिन उस मम्मी की आवाज़ कभी सुनाई नहीं दी।
आरव की बेचैनी बढ़ती गई। उसने एक रात सिया के फ़ोन में कॉल हिस्ट्री देखी — हर दिन एक ही नंबर, कुनाल का।
उसके हाथ काँप गए, लेकिन वो कुछ नहीं बोला। बस चुपचाप मोबाइल वापस रख दिया।

अगले दिन आरव का एक्सिडेंट हुआ — ब्रेक फेल। वो किसी तरह बच गया, पर उसे अंदर से लगा कि ये सब एक खेल है। उसने कुछ नहीं कहा, पर अब वो सिया और कुनाल पर नज़र रखने लगा।
कुछ ही दिनों में उसे सब साफ़ दिखने लगा — दोनों के बीच मुलाक़ातें, बातें, और अब तो पैसे की भी डील शुरू हो चुकी थी।

एक रात कुनाल ने सिया से कहा,
“अगर वो रास्ते से हट गया… तो सब आसान हो जाएगा। मैं तुम्हारे साथ रहूँगा।”
सिया डर गई, “तुम क्या कह रहे हो कुनाल? उसे मार देना?”
कुनाल मुस्कुराया, “कभी-कभी ज़िंदगी में एक मौत ही सुकून लाती है।”

सिया कुछ पल चुप रही, पर फिर बोली, “अगर यही रास्ता है, तो ठीक है।”
और उसी रात तय हुआ “क्राइम का खेल।”

आरव को अब सब समझ आ गया था, लेकिन वो सामने कुछ नहीं बोल सका। उसने बस एक बार सिया की आँखों में देखा और कहा,
“तुम्हें भरोसा चाहिए था… पर तुमने उसे सज़ा बना दिया।”

कुछ दिन बाद, सिया को कुनाल का फोन आया — “सब सेट है, बस आज रात।”
पर उसे नहीं पता था कि आरव ने सब सुन लिया है।

रात 12 बजे की घड़ी बजते ही किसी की चीख़ गूँजी —
और जब सुबह हुई, तो उस शहर की हवा में कुछ बदल गया था।

कहानी यहीं नहीं खत्म हुई…
क्योंकि अब शुरू होगा —

“Part 3 – सच का साया”,
जहाँ मौत और प्यार के बीच की लकीर हमेशा के लिए मिट जाएगी।

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